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अमृत सिद्धि की तिथियाँ

विश्वविद्यालय की प्रकाशित अध्ययन पद्धति से अमृत सिद्धि की अवधि खोजें। विशेष तिथि के प्रतिबंध मिले योग के साथ स्पष्ट दिखाई देते हैं।

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इस पृष्ठ पर दिए गए उत्तर

सामान्य प्रश्न

यह अमृत सिद्धि तालिका किस स्रोत से ली गई है?

यह पृष्ठ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की बीएजेवाई-101 अध्ययन सामग्री के मुद्रित पृष्ठ 164 पर दिए सात मेल उपयोग करता है।

कौन-से वार और नक्षत्र के मेल शामिल हैं?

रविवार-हस्त, सोमवार-मृगशिरा, मंगलवार-अश्विनी, बुधवार-अनुराधा, गुरुवार-पुष्य, शुक्रवार-रेवती और शनिवार-रोहिणी।

क्या अमृत सिद्धि और आनंदादि का अमृत एक ही हैं?

नहीं। आनंदादि के 28 योगों की तालिका अलग प्रणाली है। यह खोजक सात वार-नक्षत्र मेल उपयोग करता है।

अमृत सिद्धि की मिली अवधि में कभी प्रतिबंध क्यों दिखता है?

अध्ययन पद्धति में कुछ विशेष तिथि मेलों का दोष स्पष्ट है, जो नामित योग के साथ उपस्थित हो सकता है।

किन तिथियों में ये अपवाद लागू होते हैं?

रविवार से शनिवार तक क्रमशः पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी और एकादशी।

क्या प्रतिबंध अमृत सिद्धि अवधि के केवल एक हिस्से पर लागू हो सकता है?

हाँ। विशेष तिथि बीच में बदले तो परिणाम प्रभावित और अप्रभावित हिस्से अलग दिखाता है।

क्या यहाँ गुरुवार-पुष्य विवाह के लिए स्वीकृत है?

नहीं। अमृत सिद्धि साथ होने पर भी गुरु-पुष्य का विवाह निषेध बना रहता है।

क्या यह पृष्ठ तालिका के मूल शास्त्रीय ग्रंथ की पुष्टि का दावा करता है?

नहीं। इसका घोषित आधार विश्वविद्यालय का प्रकाशन है। उस तालिका का मूल शास्त्रीय संदर्भ अभी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।

क्या कृष्ण पक्ष की तिथियाँ अपवादों से बाहर रखी गई हैं?

नहीं। घोषित पक्ष-आधारित तिथि संख्या दोनों पक्षों में जाँची जाती है और लागू प्रतिबंध दिखाई देता है।

अमृत सिद्धि की तिथि के दूसरे कारक कहाँ देखें?

उस दिन का पंचांग लिंक खोलें और जिस काम की योजना है उसके लिए अलग मुहूर्त साधन उपयोग करें।